एनएमडीसी क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को समृद्ध करने के लिए प्रतिबद्ध-अमिताभ मुखर्जी

सीएमडी ने पंचायत प्रमुखों से की मुलाकात, ग्रामीण विकास को आत्मनिर्भर मॉडल में बदलने की बात दंतेवाड़ा में एनएमडीसी का बड़ा संवाद, गांवों की समस्याओं पर सीधे सुनवाई-जल, सडक़ और बिजली सुधार का भरोसा छत्तीसगढ़ संवाददाता बचेली/किरंदुल, 24 अप्रैल। समावेशी विकास की दिशा में एक सक्रिय कदम के रूप में, एनएमडीसी लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (सीएमडी)अमिताभ मुखर्जी ने वरिष्ठ नेतृत्व के साथ दंतेवाड़ा में एनएमडीसी की परियोजनाओं के आसपास के गांवों के पंचायत प्रमुखों के साथ एक बैठक की। बातचीत में जमीनी स्तर की समस्याओं को दूर करने और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। गुमीयापाल, समालवार, कालेपाल, चोलनार, कदम्पाल, हिरोली, बेनपाल, कोडेनार, मदकामिरस और कुट्रेम गांवों सहित एक दर्जन से अधिक सरपंचों और उनके प्रतिनिधियों ने पेयजल, सडक़ संपर्क, स्वास्थ्य देखभाल, स्ट्रीट लाइटिंग, खेल सुविधाओं और समग्र ग्रामीण बुनियादी ढांचे से संबंधित रोजमर्रा की चुनौतियों के बारे में बात की। बैठक में कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक) के साथ-साथ परियोजना के वरिष्ठ अधिकारी रबीन्द्र नारायण, अधिशासी निदेशक, किरंदुल कॉम्प्लेक्स एवं के. श्रीधर कोडाली, मुख्य महाप्रबंधक (खनन), बचेली कॉम्प्लेक्स शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए सीएमडी ने इस बात पर बल दिया कि एनएमडीसी न केवल एक प्रमुख खनन संगठन बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के एक जिम्मेदार उद्यम की भी भूमिका निभा रहा है जो क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को समृद्ध करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कंपनी की ताकत उन समुदायों के विश्वास में निहित है जिनकी वह सेवा करती है, और उनकी चिंताएं एनएमडीसी के कार्यों का मार्गदर्शन करती हैं। साथ ही, समुदायों की प्रगति एनएमडीसी की सफलता को परिभाषित करती है। उन्होंने कहा, हम इन गांवों के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि उन्हें आत्मनिर्भर बस्तियों में बदला जा सके जो विकसित भारत की भावना को दर्शाती हैं। एनएमडीसी की बैलाडीला खदानों के आस-पास के ग्रामीणों ने बेहतर पानी, सडक़ों और स्वास्थ्य देखभाल जैसी सुविधाओं पर हुई चर्चा पर प्रसन्नता व्यक्त की। स्थानीय पंचायत के एक प्रतिनिधि ने कहा, वरिष्ठ निदेशकों ने हमसे आमने-सामने बातचीत की और वास्तव में हमारी परेशानियों को सुना। कंपनी के वरिष्ठ निदेशकों की इस प्रत्यक्ष पहुंच ने ठोस बदलाव के लिए नई उम्मीद जगाई है। कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक) ने आश्वासन दिया कि एनएमडीसी स्थानीय समुदायों के साथ निरंतर संवाद करता रहेगा और इस बातचीत में साझा की गई समस्याओं से आगामी विकास पहलों को दिशा मिलेगी। बैलाडीला में 1968 में परिचालन शुरू करने के बाद से, एनएमडीसी ने अपने बचेली और किरंदुल परिसरों के माध्यम से औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय प्रगति दोनों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन वर्षों में कंपनी दंतेवाड़ा में आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास के उत्प्रेरक के रूप में उभरी है। भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के रूप में एनएमडीसी का दंतेवाड़ा में 68 वर्षों से गहन विश्वास सहज रूप से पनपा है। एनएमडीसी ने पेयजल परियोजनाएं, सडक़ें, खेल के मैदान, क्लीनिक जैसे बड़े बदलाव किए हैं। आज जमीनी स्तर पर हुई बातचीत और आदिवासियों की मूलभूत समस्याओं के आलोक में कमियों को दूर करते हुए इन कार्यों को और आगे बढ़ाया जाएगा।

एनएमडीसी क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को समृद्ध करने के लिए प्रतिबद्ध-अमिताभ मुखर्जी
सीएमडी ने पंचायत प्रमुखों से की मुलाकात, ग्रामीण विकास को आत्मनिर्भर मॉडल में बदलने की बात दंतेवाड़ा में एनएमडीसी का बड़ा संवाद, गांवों की समस्याओं पर सीधे सुनवाई-जल, सडक़ और बिजली सुधार का भरोसा छत्तीसगढ़ संवाददाता बचेली/किरंदुल, 24 अप्रैल। समावेशी विकास की दिशा में एक सक्रिय कदम के रूप में, एनएमडीसी लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (सीएमडी)अमिताभ मुखर्जी ने वरिष्ठ नेतृत्व के साथ दंतेवाड़ा में एनएमडीसी की परियोजनाओं के आसपास के गांवों के पंचायत प्रमुखों के साथ एक बैठक की। बातचीत में जमीनी स्तर की समस्याओं को दूर करने और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। गुमीयापाल, समालवार, कालेपाल, चोलनार, कदम्पाल, हिरोली, बेनपाल, कोडेनार, मदकामिरस और कुट्रेम गांवों सहित एक दर्जन से अधिक सरपंचों और उनके प्रतिनिधियों ने पेयजल, सडक़ संपर्क, स्वास्थ्य देखभाल, स्ट्रीट लाइटिंग, खेल सुविधाओं और समग्र ग्रामीण बुनियादी ढांचे से संबंधित रोजमर्रा की चुनौतियों के बारे में बात की। बैठक में कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक) के साथ-साथ परियोजना के वरिष्ठ अधिकारी रबीन्द्र नारायण, अधिशासी निदेशक, किरंदुल कॉम्प्लेक्स एवं के. श्रीधर कोडाली, मुख्य महाप्रबंधक (खनन), बचेली कॉम्प्लेक्स शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए सीएमडी ने इस बात पर बल दिया कि एनएमडीसी न केवल एक प्रमुख खनन संगठन बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के एक जिम्मेदार उद्यम की भी भूमिका निभा रहा है जो क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को समृद्ध करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कंपनी की ताकत उन समुदायों के विश्वास में निहित है जिनकी वह सेवा करती है, और उनकी चिंताएं एनएमडीसी के कार्यों का मार्गदर्शन करती हैं। साथ ही, समुदायों की प्रगति एनएमडीसी की सफलता को परिभाषित करती है। उन्होंने कहा, हम इन गांवों के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि उन्हें आत्मनिर्भर बस्तियों में बदला जा सके जो विकसित भारत की भावना को दर्शाती हैं। एनएमडीसी की बैलाडीला खदानों के आस-पास के ग्रामीणों ने बेहतर पानी, सडक़ों और स्वास्थ्य देखभाल जैसी सुविधाओं पर हुई चर्चा पर प्रसन्नता व्यक्त की। स्थानीय पंचायत के एक प्रतिनिधि ने कहा, वरिष्ठ निदेशकों ने हमसे आमने-सामने बातचीत की और वास्तव में हमारी परेशानियों को सुना। कंपनी के वरिष्ठ निदेशकों की इस प्रत्यक्ष पहुंच ने ठोस बदलाव के लिए नई उम्मीद जगाई है। कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक) ने आश्वासन दिया कि एनएमडीसी स्थानीय समुदायों के साथ निरंतर संवाद करता रहेगा और इस बातचीत में साझा की गई समस्याओं से आगामी विकास पहलों को दिशा मिलेगी। बैलाडीला में 1968 में परिचालन शुरू करने के बाद से, एनएमडीसी ने अपने बचेली और किरंदुल परिसरों के माध्यम से औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय प्रगति दोनों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन वर्षों में कंपनी दंतेवाड़ा में आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास के उत्प्रेरक के रूप में उभरी है। भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के रूप में एनएमडीसी का दंतेवाड़ा में 68 वर्षों से गहन विश्वास सहज रूप से पनपा है। एनएमडीसी ने पेयजल परियोजनाएं, सडक़ें, खेल के मैदान, क्लीनिक जैसे बड़े बदलाव किए हैं। आज जमीनी स्तर पर हुई बातचीत और आदिवासियों की मूलभूत समस्याओं के आलोक में कमियों को दूर करते हुए इन कार्यों को और आगे बढ़ाया जाएगा।