पश्चिम एशिया संकट से व्यापार और एमएसएमई पर असर की कैट की आशंका, वित्तमंत्री से अपील

रायपुर, 10 अप्रैल। व्यापारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय वाइस चेयरमेन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य अमर पारवानी, छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन जितेंद्र दोशी, विक्रम सिंहदेव, अध्यक्ष परमानंद जैन, महामंत्री सुरिंदर सिंह, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र जग्गी, राम मंधान, वासु मखीजा, भरत जैन, राकेश ओचवानी तथा शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से बताया कि कैट पश्चिम एशिया में जारी संकट के भारत के व्यापार और उद्योग, विशेषकर छोटे व्यापारियों एवं एमएसएमई क्षेत्र पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की है तथा सरकार से समय रहते आवश्यक राहत एवं नीतिगत उपाय करने का आग्रह किया है। श्री पारवानी ने बताया कि कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन को आज भेजे एक पत्र में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सक्रिय एवं निर्णायक नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सतत निगरानी और समयबद्ध हस्तक्षेप के कारण वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत और स्थिर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि स्रोतों के विविधीकरण, लॉजिस्टिक्स ढांचे के सुदृढ़ीकरण, संतुलित वित्तीय प्रबंधन तथा आवश्यक वस्तुओं की निरंतर निगरानी जैसे कदमों ने देश में उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखा है, जिससे व्यापार जगत में विश्वास बना है। श्री पारवानी ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, आपूर्ति बाधाएं और लागत में बढ़ोतरी से कई क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इनमें प्रमुख रूप से पेट्रोकेमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, प्लास्टिक, टेक्सटाइल, उर्वरक, केमिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, लॉजिस्टिक्स और अन्य ऊर्जा-आधारित उद्योग शामिल हैं। निर्यातकों को फ्रेट और बीमा लागत में वृद्धि, शिपमेंट में देरी, रूट परिवर्तन तथा भुगतान संबंधी अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी। श्री पारवानी ने बताया कि इन परिस्थितियों को देखते हुए कैट ने सरकार से आग्रह किया है कि एमएसएमई एवं छोटे व्यापारियों को ऋण चुकौती में अतिरिक्त समय एवं राहत, प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष क्रेडिट गारंटी योजना,गंभीर रूप से प्रभावित उद्योगों के लिए ब्याज सब्सिडी, ईंधन एवं कच्चे माल की कीमतों की निरंतर निगरानी और स्थिरीकरण उपाय तथा निर्यातकों के लिए फ्रेट, बीमा सहायता एवं शीघ्र रिफंड सुनिश्चित हो जिससे उनको व्यापार में असुविधा न हो।

पश्चिम एशिया संकट से व्यापार और एमएसएमई पर असर की कैट की आशंका, वित्तमंत्री से अपील
रायपुर, 10 अप्रैल। व्यापारी संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय वाइस चेयरमेन एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (भारत सरकार) के सदस्य अमर पारवानी, छत्तीसगढ़ इकाई के चेयरमेन जितेंद्र दोशी, विक्रम सिंहदेव, अध्यक्ष परमानंद जैन, महामंत्री सुरिंदर सिंह, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष राजेंद्र जग्गी, राम मंधान, वासु मखीजा, भरत जैन, राकेश ओचवानी तथा शंकर बजाज ने संयुक्त रूप से बताया कि कैट पश्चिम एशिया में जारी संकट के भारत के व्यापार और उद्योग, विशेषकर छोटे व्यापारियों एवं एमएसएमई क्षेत्र पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की है तथा सरकार से समय रहते आवश्यक राहत एवं नीतिगत उपाय करने का आग्रह किया है। श्री पारवानी ने बताया कि कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन को आज भेजे एक पत्र में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सक्रिय एवं निर्णायक नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सतत निगरानी और समयबद्ध हस्तक्षेप के कारण वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत और स्थिर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि स्रोतों के विविधीकरण, लॉजिस्टिक्स ढांचे के सुदृढ़ीकरण, संतुलित वित्तीय प्रबंधन तथा आवश्यक वस्तुओं की निरंतर निगरानी जैसे कदमों ने देश में उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित रखा है, जिससे व्यापार जगत में विश्वास बना है। श्री पारवानी ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, आपूर्ति बाधाएं और लागत में बढ़ोतरी से कई क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इनमें प्रमुख रूप से पेट्रोकेमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, प्लास्टिक, टेक्सटाइल, उर्वरक, केमिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, लॉजिस्टिक्स और अन्य ऊर्जा-आधारित उद्योग शामिल हैं। निर्यातकों को फ्रेट और बीमा लागत में वृद्धि, शिपमेंट में देरी, रूट परिवर्तन तथा भुगतान संबंधी अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी। श्री पारवानी ने बताया कि इन परिस्थितियों को देखते हुए कैट ने सरकार से आग्रह किया है कि एमएसएमई एवं छोटे व्यापारियों को ऋण चुकौती में अतिरिक्त समय एवं राहत, प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष क्रेडिट गारंटी योजना,गंभीर रूप से प्रभावित उद्योगों के लिए ब्याज सब्सिडी, ईंधन एवं कच्चे माल की कीमतों की निरंतर निगरानी और स्थिरीकरण उपाय तथा निर्यातकों के लिए फ्रेट, बीमा सहायता एवं शीघ्र रिफंड सुनिश्चित हो जिससे उनको व्यापार में असुविधा न हो।